1.【मुझे फ़ख़्र है अपने देशद्रोही होने पर】
मैं जीने के लिए
सच का साथ चुनता हूँ
मैं कविताएँ लिखता हूँ
मैं साहित्य पढ़ता हूँ
मेरा कोई धर्म नहीं
सिवाय आदमी होने के
मैं किसी ईश्वर की पूजा नहीं करता
मेरा कोई ईष्ट देवता नहीं
इस तरह उनकी नजरों में
मैं एक देशद्रोही हूँ
उन्हें आपत्ति है मेरे सच कहने से
उनका मानना है
मेरी कविताओं को कोई हक नहीं
कि वे दबे, कुचले, शोषितों, वंचितों की आवाज बने
उन्हें आपत्ति है
कि मैं विज्ञान का विद्यार्थी होकर
साहित्य क्यों पढ़ता हूँ
उन्हें आपत्ति है कि
मैं किसी स्त्री से बेइंतहा मुहब्बत करता हूँ
उन्हें आपत्ति है कि
मैं उनकी विचारधारा से सहमत नहीं
उनके जैसे परिधान नहीं पहनता
उनके धर्म के पताके नहीं फहराता
उन्हें आपत्ति है कि
मेरी मण्डली में उनकी जमात का कोई
नेता, हत्यारा, बलात्कारी या पूँजीपति नहीं
उन्हें आपत्ति है कि
मैं नागपुरिया फरमान की जगह
अपने देश के संविधान को मानता हूँ
उनकी आपत्ति ही अगर
देशद्रोही होने की परिभाषा है
तो मुझे फ़ख़्र है
अपने देशद्रोही होने पर
और मैं यह चाहूँगा कि
देश की पूरी अवाम देशद्रोही बन जाए...
-परितोष
मैं जीने के लिए
सच का साथ चुनता हूँ
मैं कविताएँ लिखता हूँ
मैं साहित्य पढ़ता हूँ
मेरा कोई धर्म नहीं
सिवाय आदमी होने के
मैं किसी ईश्वर की पूजा नहीं करता
मेरा कोई ईष्ट देवता नहीं
इस तरह उनकी नजरों में
मैं एक देशद्रोही हूँ
उन्हें आपत्ति है मेरे सच कहने से
उनका मानना है
मेरी कविताओं को कोई हक नहीं
कि वे दबे, कुचले, शोषितों, वंचितों की आवाज बने
उन्हें आपत्ति है
कि मैं विज्ञान का विद्यार्थी होकर
साहित्य क्यों पढ़ता हूँ
उन्हें आपत्ति है कि
मैं किसी स्त्री से बेइंतहा मुहब्बत करता हूँ
उन्हें आपत्ति है कि
मैं उनकी विचारधारा से सहमत नहीं
उनके जैसे परिधान नहीं पहनता
उनके धर्म के पताके नहीं फहराता
उन्हें आपत्ति है कि
मेरी मण्डली में उनकी जमात का कोई
नेता, हत्यारा, बलात्कारी या पूँजीपति नहीं
उन्हें आपत्ति है कि
मैं नागपुरिया फरमान की जगह
अपने देश के संविधान को मानता हूँ
उनकी आपत्ति ही अगर
देशद्रोही होने की परिभाषा है
तो मुझे फ़ख़्र है
अपने देशद्रोही होने पर
और मैं यह चाहूँगा कि
देश की पूरी अवाम देशद्रोही बन जाए...
2.【आलिंगन】
तुम्हारे आलिंगन में
जितनी ठंडक है
ठहराव है
सुकून है, नशा है
इस ग्रह पर कहीं और नहीं
जितनी ठंडक है
ठहराव है
सुकून है, नशा है
इस ग्रह पर कहीं और नहीं
मकान के भीतर
तुम मेरा घर हो...
तुम मेरा घर हो...
3.【प्रेम में हूँ】
मैं अपने खानदान, अपनी बिरादरी में
अबतक का
सबसे बदनाम आदमी हूँ
अबतक का
सबसे बदनाम आदमी हूँ
मैंने बेहद संगीन अपराध किया है
हर तरफ मेरे अपने
मेरी हत्या के लिए दिनरात
मुझे ढ़ूँढ़ रहे हैं
हर तरफ मेरे अपने
मेरी हत्या के लिए दिनरात
मुझे ढ़ूँढ़ रहे हैं
उन्हें खबर लग गयी है
मैं किसी स्त्री के
प्रेम में हूँ...
मैं किसी स्त्री के
प्रेम में हूँ...
4.【सोचता हूँ】
जब भी सोचता हूँ
तुम्हारे बारे में
हर बार यही लगता है
कितना कुछ लिखा जाना शेष है
तुम्हारे बारे में
हर बार यही लगता है
कितना कुछ लिखा जाना शेष है
कलम उठाने के बाद
पहले देखता हूँ
उनमें कितनी बची है स्याही
पहले देखता हूँ
उनमें कितनी बची है स्याही
तुम्हारे बदन को चूमने से पहले
महसूसता हूँ
कितनी बची है तुममें थकान
महसूसता हूँ
कितनी बची है तुममें थकान
फिर सोचता हूँ
सुबह उठने के लिए
कितने बजे का लगाना है अलार्म...
सुबह उठने के लिए
कितने बजे का लगाना है अलार्म...
5.【बन्दूक】
(एक)
उन्होंने तुम्हें कभी नहीं कहा
बन्दूक उठाओ
उन्होंने बस रख दिया
तुम्हारे हाथों में धर्मग्रंथ...
बन्दूक उठाओ
उन्होंने बस रख दिया
तुम्हारे हाथों में धर्मग्रंथ...
(दो)
उन्हें सत्ता पर काब़िज होने के लिए
बन्दूक नहीं उठानी होती है
वे बड़े चालाक हैं
उन्होंने बखूबी जान लिया है
तुम्हारी कमजोरी तुम्हारा ईश्वर है
इसलिए वे बोतें हैं
तुम्हारे भीतर धर्म का बीज
ताकि तुम खुद ही अपने हाथों में
तान लो अपने-अपने धर्म की बंदूकें
बन्दूक नहीं उठानी होती है
वे बड़े चालाक हैं
उन्होंने बखूबी जान लिया है
तुम्हारी कमजोरी तुम्हारा ईश्वर है
इसलिए वे बोतें हैं
तुम्हारे भीतर धर्म का बीज
ताकि तुम खुद ही अपने हाथों में
तान लो अपने-अपने धर्म की बंदूकें
और वे बड़े आराम से
तुम्हारा शासक बन चरते रहें
तुम्हारी पूरी आवाम को...
तुम्हारा शासक बन चरते रहें
तुम्हारी पूरी आवाम को...
(तीन)
उसे बलात्कार करना था
उसने बन्दूक नहीं निकाली
गोलियों की छर्रियाँ भी नहीं दिखायी
नाहीं उसने लड़की को
चाकू दिखाकर भयभीत किया
उसने बन्दूक नहीं निकाली
गोलियों की छर्रियाँ भी नहीं दिखायी
नाहीं उसने लड़की को
चाकू दिखाकर भयभीत किया
उसने बड़े आराम से चखा
अलग-अलग अंगों का
अलग-अलग स्वाद
फिर किया बलात्कार
अलग-अलग अंगों का
अलग-अलग स्वाद
फिर किया बलात्कार
उसने पढ़ लिया था
एक लड़की के भीतर का कमजोर पक्ष
उसे मालूम था बलात्कार से पहले
प्रेम का सारा समीकरण...
एक लड़की के भीतर का कमजोर पक्ष
उसे मालूम था बलात्कार से पहले
प्रेम का सारा समीकरण...
6.【यह जानते हुए भी】
कितना अनूठा है
कितना आश्चर्यजनक है
यह जानते हुए भी, कि
इस ग्रह पर
उसे चाहने वालों की
बेहद लम्बी फेहरिस्त है
कितना आश्चर्यजनक है
यह जानते हुए भी, कि
इस ग्रह पर
उसे चाहने वालों की
बेहद लम्बी फेहरिस्त है
और इनदिनों प्रेम की
बदलती परिभाषाओं के बीच
मैं उन सूचीबद्ध लोगों से
कितना कमतर, कितना अलग
कितना मिसफिट, कोसों दूर हूँ
बदलती परिभाषाओं के बीच
मैं उन सूचीबद्ध लोगों से
कितना कमतर, कितना अलग
कितना मिसफिट, कोसों दूर हूँ
मेरी अधरों पर
अपनी अधरों को टिकाते हुए
उसने कहा
तुम्हारी आँखों में
मेरे हिस्से की समूची दुनिया है...
अपनी अधरों को टिकाते हुए
उसने कहा
तुम्हारी आँखों में
मेरे हिस्से की समूची दुनिया है...
-परितोष
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